परिचय:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी पारा तेजी से चढ़ रहा है। जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सीट बंटवारे का फार्मूला तय कर एकजुटता का संदेश दिया है, वहीं महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) में सीटों के बंटवारे को लेकर घमासान मचा हुआ है। अंदरूनी मतभेद और टिकट वितरण पर असहमति ने विपक्षी गठबंधन को मुश्किल में डाल दिया है।
NDA का फाइनल फार्मूला: BJP-JDU को बराबर सीटें
बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर NDA ने सीट बंटवारे का फॉर्मूला फाइनल कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यू) को 101-101 सीटें मिली हैं।
लोजपा (रामविलास) को 29 सीटें दी गई हैं।
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 6-6 सीटें मिली हैं।
NDA ने यह कदम जल्दी उठाकर चुनावी रणनीति में स्पष्टता और एकता का संदेश देने की कोशिश की है। यह रणनीति मतदाताओं के बीच स्थिरता और तैयारियों का संकेत देती है।
महागठबंधन में सीट बंटवारे पर असहमति
अंदरूनी खींचतान
महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर स्थिति उलझी हुई है।
राजद (RJD) को 135 सीटों का प्रस्ताव मिला है,
कांग्रेस को 61 सीटें,
और वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) को करीब 16 सीटें दी जाने की बात सामने आई है।
लेकिन कांग्रेस और RJD दोनों ही इस फॉर्मूले से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। कई सीटों पर दावेदारी को लेकर मतभेद बढ़ गए हैं।
रातों-रात बदलते फैसले और विवाद
हाल ही में RJD ने अपने कुछ प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न दे दिए थे, लेकिन देर रात उन्हें वापस बुला लिया गया। यह कदम गठबंधन के अंदर तालमेल की कमी को दर्शाता है।
इसी बीच खबरें हैं कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के बीच टिकट वितरण को लेकर मतभेद उभर आए हैं। तेजस्वी ने अपने पिता को कुछ टिकट रोकने की सलाह दी, जिससे गठबंधन के भीतर असहजता बढ़ गई।
NDA को रणनीतिक बढ़त, विपक्ष में उथल-पुथल
NDA का स्पष्ट सीट फार्मूला उसे रणनीतिक बढ़त देता है। गठबंधन अब प्रचार और उम्मीदवार चयन पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
इसके विपरीत, महागठबंधन अभी तक अंतिम निर्णय नहीं ले पाया है, जिससे उसके चुनावी अभियान में देरी हो रही है।
चुनाव नजदीक हैं और समय तेजी से निकल रहा है। अगर महागठबंधन जल्द स्पष्ट रणनीति नहीं अपनाता, तो मतदाताओं के बीच उसकी छवि कमजोर पड़ सकती है।
मतदाताओं की नजर: नेतृत्व और स्थिरता पर
बिहार के मतदाता इस बार स्थिरता और नेतृत्व पर खास ध्यान दे रहे हैं।
NDA ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार उसका मुख्यमंत्री चेहरा होंगे।
दूसरी ओर, महागठबंधन में अभी यह तय नहीं है कि कौन नेतृत्व करेगा — तेजस्वी यादव या कोई साझा चेहरा।
निष्कर्ष:
बिहार चुनाव 2025 में सीट बंटवारा ही सत्ता की दिशा तय करेगा। NDA ने अपनी रणनीति तय कर चुनावी मैदान में मजबूती से उतरने की तैयारी कर ली है। वहीं, महागठबंधन के भीतर बढ़ते मतभेद और अनिश्चितता उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं।
आने वाले हफ्तों में यह साफ होगा कि बिहार की जनता किसे अपना भरोसा देती है — स्थिर NDA को या असमंजस में फंसे महागठबंधन को।

