इंसानियत की मिसाल
जब इंसानियत बोलती है, तो धर्म, जाति और सरहदें सब पीछे छूट जाती हैं। कुछ ऐसा ही नज़ारा सोशल मीडिया पर देखने को मिला, जब एक मुस्लिम युवक ने मदीना शरीफ़ में खड़े होकर हिंदू संत प्रेमानंद जी महाराज के लिए दुआ मांगी।
यह वीडियो जैसे ही सामने आया, इंटरनेट पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर किसी ने कहा — “यही है असली भारत, जहाँ दिल जुड़े हैं, मज़हब नहीं।”
कौन हैं प्रेमानंद जी महाराज?
प्रेमानंद जी महाराज वृंदावन के प्रसिद्ध संत हैं, जो अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं और सरल जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं।
हाल ही में उन्हें किडनी से जुड़ी दिक्कतों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके स्वास्थ्य की जानकारी जैसे ही भक्तों तक पहुँची, हर धर्म और समुदाय के लोगों ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना शुरू कर दी।
मदीना से आई एक दुआ
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक़ रखने वाले सुफियान अल्लाहाबादी नाम के युवक ने मदीना में खड़े होकर अल्लाह से दुआ मांगी — “या अल्लाह, भारत के इस महान संत प्रेमानंद महाराज को स्वस्थ कर दे, ताकि वे लोगों को सच्चाई और प्रेम का रास्ता दिखाते रहें।”सुफियान ने अपने फोन पर महाराज की तस्वीर दिखाते हुए कहा — “हिंदू हो या मुसलमान, इंसानियत सबसे बड़ी है।”उनकी यह बात लोगों के दिलों में उतर गई। वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर गंगा-जमुनी तहज़ीब
ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस दुआ का वीडियो हजारों बार साझा किया गया।
लोगों ने इसे भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब की सबसे सुंदर झलक बताया। कई उपयोगकर्ताओं ने लिखा — “मदीना से वृंदावन तक, यह दुआ दिलों को जोड़ने वाला पुल है।”
धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया
मौलाना शाहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम जामियात, ने कहा — “यह इस्लाम की असली पहचान है — मुहब्बत, इंसानियत और एकता।”उन्होंने भी प्रेमानंद जी महाराज के स्वस्थ होने की दुआ की और कहा कि समाज को ऐसी मिसालों से सीख लेनी चाहिए।
प्रेमानंद जी महाराज की सेहत में सुधार
वृंदावन आश्रम से मिली जानकारी के अनुसार, महाराज की तबीयत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। भक्त लगातार उनके लिए प्रार्थना और दुआ कर रहे हैं।
संदेश साफ़ है — धर्म नहीं, दिल जोड़ता है
यह घटना हमें याद दिलाती है कि —
- मज़हब अलग हो सकता है, मगर इंसानियत एक है।
- जब कोई दिल से दुआ करता है, तो ईश्वर और अल्लाह दोनों सुनते हैं।
- यह वही भारत है, जहाँ “राम भी हमारे हैं, रहमान भी।”

